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मुख्यमंत्री नायब सैनी ने दिया आश्वासन, एक भी मकान नहीं गिरेगा

80 घंटे बाद किसान उतरा मोबाइल टावर से, ग्रामीण बोले 'सुनील हमारा हीरो'

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Haryana News : शुक्रवार की रात सोनीपत में मोबाइल टावर पर चढ़ा किसान मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद टावर से नीचे उतर आया। टावर से नीचे उतरने के बाद किसान को हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहनलाल बडोली ने गले लगाया, मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा ने उन्हें माला पहनाई और मिठाई खिलाई। गांव के लोगों ने इस किसान को अपना हीरो बताया।

असल में यह मामला दो दशक पुराना है। वर्ष 2006 भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने जमीन का अधिग्रहण कर लिया था। उस समय किसानों को साढ़े 12 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देना तय हुआ था लेकिन किसानों ने मुआवजा लेने से इनकार कर दिया। लेकिन जमीन पर कब्जे को लेकर किसानों और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के बीच कई बार विवाद हो चुका है। मंगलवार को जब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की टीम यहां बने करीब 150 मकान को गिरने के लिए पहुंची और सबसे पहले सुनील का मकान गिराने की तैयारी हुई तो सुनील 250 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ गया।

सुनील ने साफ किया कि जब तक उनके मकानों को बचाने का फैसला नहीं होगा तब तक वह टावर पर ही अनशन पर बैठा रहेगा। सुनील मंगलवार को करीब 1:00 बजे टावर पर चढ़ा था और अब शुक्रवार रात करीब 9:00 बजे वह टावर से नीचे आया है।

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हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहनलाल बडोली इससे पहले मुख्यमंत्री का संदेश लेकर किसान सुनील के घर पहुंचे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि एक भी मकान को गिरने नहीं दिया जाएगा। इसके बाद मोहनलाल बडोली ने टावर के पास आकर इस बात दोहराया तो सुनील नीचे उतर आया।

सुनील के नीचे आने के बाद गांव के लोगों ने उसे पगड़ी बांधी है और उसे अपना हीरो बताया है। कहा कि पूरे गांव ही नहीं बल्कि आसपास के एरिया के लिए भी सुनील ने बड़ा काम किया है। जो काम में कई साल से नहीं हो पा रहा था, वह आज चार दिन में सुनील के कठोर संघर्ष के कारण हो गया है। सुनील वास्तव में हमारा हीरो है।

किसान अपने घर-स्कूल पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की टीम द्वारा बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ अनशन पर बैठा था। आज हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली उसके घर पहुंचे और उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री नायब सैनी का संदेश लेकर आया हूं कि किसी का भी घर नहीं टूटेगा। इस आश्वासन पर किसान सुनील टावर से नीचे उतर आया और सीधे बड़ौली के पास पहुंचा। उसने प्रदेश अध्यक्ष के पैर छुए, जबकि ओएसडी वीरेंद्र सिंह बढ़खालसा ने उसे मिठाई खिलाकर और फूल माला पहनाकर सम्मानित किया।

प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने बताया कि एजुकेशन सिटी के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन यहां 1995 से पुराने मकान बने हुए थे। जब पाइपलाइन, बिजली के खंभे और अन्य विकास कार्य शुरू हुए तो लोगों ने इसका विरोध किया और लंबे समय से संघर्ष जारी रहा।

बड़ौली ने बताया कि किसान सुनील का टावर पर चढ़ना एक तरह से प्रशासन और सरकार को फिर से जागरूक करने का काम है। यह चौथा दिन था और इस दौरान गांव असावरपुर और आसपास के गांवों के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला, जिसमें दो महिलाओं को भी शामिल किया गया। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री के सामने राई एजुकेशन सिटी का पूरा नक्शा अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने पूरी स्थिति को समझते हुए आवश्यक निर्देश दिए और समस्या के समाधान के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो जल्द ही सभी के हित में काम करेगी।

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ही सुनील को टावर से नीचे उतरने का संदेश दिया था, ताकि वह अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सके। उसी आदेश के तहत वे मौके पर पहुंचे और स्थिति को शांत कराया।

मोहनलाल बड़ौली ने कहा कि उन्होंने गांव असावरपुर की जनता के बीच पूरी जिम्मेदारी ली है। फिलहाल अधिकारियों की ड्यूटी चुनाव में लगी हुई है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया समाप्त होते ही इस मुद्दे के समाधान के लिए तेजी से काम किया जाएगा।

किसान सुनील ने बताया कि वह मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे टावर पर चढ़ा था। एचएसवीपी के अधिकारियों की ओर से दीवार गिराने की कार्रवाई के चलते उसका मकान और स्कूल प्रभावित हो रहे थे, जिन्हें बचाने के लिए उसने यह कदम उठाया। सुनील ने आरोप लगाया कि उसने अधिकारियों को कोर्ट के दस्तावेज दिखाए थे, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई जारी रही। उसके बाथरूम और कमरे तक गिरा दिए गए, जिससे वह मजबूर होकर विरोध में टावर पर चढ़ गया। किसान ने कहा कि वह मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आश्वासन से संतुष्ट है।

ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा ने कहा मुख्यमंत्री ने अपने उदार दिल के साथ कहा है कि किसी भी किसान का एक भी मकान नहीं तोड़ा जाएगा और सब के साथ बैठकर जमीन के बदले जमीन दी जाएगी। आश्वासन दिया कि किसी भी किसान का अहित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर कमेटी गठित की गई है, जो केएम पांडुरंग, चंद्रशेखर खरे, सीएम ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा, राजेश कलर की मॉनिटरिंग में काम करेगी। उन्होंने कहा कि केएम पांडूरंग पूर्व में सोनीपत के डीसी भी रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि डेढ़ महीने के भीतर सारा कार्य कंप्लीट कर दिया जाएगा।

इधर हशविप्रा के अधिकारियों के अनुसार यह जमीन 60 मीटर चौड़ी सड़क के एलाइनमेंट में आती है, जिसके चलते इसे खाली कराना जरूरी था। प्रशासन का कहना था कि संबंधित व्यक्ति और अन्य लोग इस जमीन पर अवैध कब्जा कर रखे हैं। कई बार नोटिस देने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही यह कार्रवाई की जा रही थी। HSVP के अधिकारी सिद्धार्थ ने बताया कि यदि जमीन मालिक अभी भी मुआवजा लेना चाहते हैं, तो वे आवेदन कर सकते हैं। लेकिन, उन्हें वर्ष 2006 के निर्धारित रेट के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा, जो करीब 12.50 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया गया था।

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वीरवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे और सरकार पर अन्याय के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि यह मामला दो दशक पुराना है और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में जमीन अधिग्रहण के कारण हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।

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